बस यूँ ही -3

रोज एक नया धर्म जन्म ले रहा है

और धर्म के ठेकेदार आज भी

जो लिखा या बोला गया है

उससे आगे न तो सोचने

और न ही बोलने देते हैं

तभी तो धर्म पिछड़ रहा है

और विज्ञान आगे बढ़ रहा है