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अक्षित अपने माँ-बाप की अकेली औलाद था वह अपने माँ-बाप का प्यार व दुलार पा कर बहुत ही जिद्दी हो गया था और इसी के चलते एक दिन वह हादसे का शिकार हो कोमा में चला जाता है | होश में आने पर उसकी जिंदगी पूरी तरह से पलट जाती है | हरफनमौला बच्चा एक दब्बू इंसान बन गया था | वक्त और हालात की ठोकरे खाने के बाद वह आपने आप को सम्भालने में जुट जाता है | जिन्दगी की जूझन से उभारने व उसे आगे बढ़ाने में एक अनजान ताकत उसका साथ दे रही थी जिसका आभास उसे तब होता है जब उसके साथ कई रहस्यमय एवं अलौकिक घटनाएँ होती हैं | जिन्हें वह बहुत बाद में तब समझ पाता है जब उसकी जिन्दगी में दो अजनबी आते हैं | वह दो अजनबी उसकी जिन्दगी एक बार फिर से…..

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यह पुस्तक उन लोगों के लिए है जो ध्यान की यात्रा पर निकलना चाहते हैं, लेकिन उनके पास बहुत कम या कोई पूर्व अनुभव नहीं है। यह अनुभवी अभ्यासियों के लिए भी एक मार्गदर्शक है, जो वर्षों के प्रयास के बावजूद, अपने अभ्यास को गहरा करने में असमर्थ हैं या जहाँ से उन्होंने पहली बार शुरू किया था, वहीं वापस आ गए हैं। इस पुस्तक का उद्देश्य ध्यान के बारे में गलत धारणाओं को दूर करना है। यह पुस्तक व्यावहारिक मार्गदर्शन करती है कि ध्यान क्यों आवश्यक है, इसका अभ्यास कैसे करें, और यह किस तरह से उपचार और कल्याण में सहायता हो  सकती है। तीस साल की आध्यात्मिक यात्रा के अनुभव, साथ ही ध्यान सीखने के दौरान व्यक्तियों द्वारा सामना की जाने वाली उलझनों और चुनौतियों और उनके समाधानों के बारे में अंतर्दृष्टि, सभी इस पुस्तक में प्रस्तुत किए गए हैं और आने वाले कार्यों में साझा किए जाते रहेंगे। यहाँ, आप ध्यान के सबसे सच्चे रूप में दर्शन पाएंगे। ध्यान, जिसे अक्सर रहस्य में लपेटा जाता है, मानव जीवन का एक स्वाभाविक, अभिन्न अंग के रूप में प्रकट होता है – एक ऐसा अंग जो हमेशा से हमारे अस्तित्व के लिए आवश्यक रहा है और रहेगा।

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आज के समय में बहुत लोग ध्यान या मैडिटेशन की ओर आकर्षित हो रहे हैं | कोशिश तो बहुत लोग करते हैं लकिन सफल इका-दुक्का ही हो पाते हैं | असफलता का कारण किसी व्यक्ति विशेष में नहीं है बल्कि ध्यान की विधि में हैं |तंत्र की इस शाखा (विज्ञान भैरव) में इसी समस्या का हल दिया गया है | तंत्र, आत्मा से शुरू हो परमात्मा तक पहुँचने का सबसे सरल उपाय है | तंत्र की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह आप जैसे हैं वैसे का वैसा स्वीकार कर लेता है | यह आपको आपके धर्म या आस्था या विश्वास को छोड़ने को नहीं कहता | यहाँ तक कि तंत्र किसी भौतिकवादी कार्य तक को छोड़ने को नहीं कहता | यह ज्ञान को सिर्फ इसलिए छोड़ने को कहता है ताकि आप जल्द से जल्द इस मार्ग पर आगे बढ़ सकें क्योंकि ज्ञान से अहंकार अपने आप चला आता है जो किसी भी मार्ग पर चलने में मुख्य बाधक है लेकिन यदि आप नहीं छोड़ सकते या नहीं छोड़ पा रहे हैं तब भी तंत्र सीखने में कोई बाधा नहीं है | हाँ, कुछ समय ज्यादा जरूर लगेगा लेकिन आप जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे वैसे-वैसे सब कुछ अपने आप से छूटता चला जाएगा |

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यह कहानी संग्रह बहुत ही रोचक और अनूठी कहानियों से सुसज्जित है | इस संग्रह में कुल १६ कहानियाँ हैं जोकि रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी हुई हैं | आपको हर कहानी पढ़ते हुए ऐसा एहसास अवश्य होगा कि ऐसा आपने भी अपने आस-पास देखा या सुना है लेकिन इसका हल या अंत ऐसा भी हो सकता है, जानकार आप सोचने को मजबूर हो जायेंगे |

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यह उपन्यास, दीन-दुनिया से बेखबर अपनी मौज-मस्ती में डूबी हुई एक ऐसी लड़की के इर्दगिर्द घूमती कहानी है जिसकी ज़िन्दगी में एक रात ऐसा तूफ़ान आया जो उसका सब कुछ छीन कर ले गया | उसकी डूबती-टूटती ज़िन्दगी और हिम्मत का हर नजदीकी ने भरपूर फायदा उठाया | उसकी ज़िन्दगी बद-बदत्तर करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी लेकिन इसके बावजूद वह लड़ती रही और उन्हें अपने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया | इसी बीच एक दिन उसकी वीरान ज़िन्दगी में एक ऐसा व्यक्ति आया जिसका इन्तेजार वह बरसों से कर रही थी लेकिन वह उस मुकाम पर आया जब वह उसे चाह कर भी अपना नहीं बना पाई |
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यह उपन्यास तीन दोस्तों की कॉलेज में मौज-मस्ती और कॉलेज से निकलने के बाद की जिन्दगी पर आधारित है | कॉलेज का प्यार और दोस्ती, अंतिम वर्ष तक अपने चर्म पर पहुँच जाती है और फिर सब अलग-अलग हो जाते हैं लेकिन कोई भी कॉलेज में बिताये पल भूल नहीं पाता | रीना, गौरव से प्रेम करती है लेकिन इजहार नहीं कर पाती है | रीना ये नहीं समझ पा रही थी कि गौरव पास आकर भी दूरी क्यों बनाये रखता है | गौरव को एक सपना कई बार आ चुका था,  जिस में उसके पिता किसी जगह भाषण देने गये हैं और अचानक वहाँ दो बम फट जाते हैं | गौरव के पिता, अक्षित गौरव को सम्मोहित कर सपने का राज पता करते हैं | गौरव अपने दोस्त कुणाल को ड्रग्स और आतंकवाद के चुंगल से बचाने में कामयाब हो जाता है | प्रेम-नफ़रत, दोस्ती-दुश्मनी, आध्यात्म-ध्यान, समस्या-हल….. आदि, जैसे कई विषय इस उपन्यास में पिरोये हुए हैं |