विज्ञान भैरव तंत्र – सूत्र- 82

दोस्तों, इस सूत्र में बताई गई विधि अपना कर अपनी सोच से स्वतंत्र से हो सकते हैं और वो भी एक बहुत ही आसान तरीके से |
इस विधि अनुसार आप यह क्रिया दिन या रात में कभी भी कर सकते हैं | सिद्धासन या सुखासन या वज्रासन में या आप कुर्सी पर बैठ कर भी कर सकते है जैसे आपको सुविधाजनक लगे वैसे बैठें | यह क्रिया करते हुए आप आँख खोल भी सकते हैं बंद भी कर सकते हैं |
हमारे अनुसार आप यह विधि किसी पार्क में या जमीन पर सिद्धासन या वज्रासन में बैठ कर या खड़े हो कर और आँख बंद करके करेंगे तो सफलता जल्दी मिल सकती है वरना आपको कुछ समय लगेगा |
इस सूत्र में बताई विधि के अनुसार आपको बैठने के बाद आपकी साँस धीमी गति से चलनी चाहिए जोकि धीरे-धीरे लम्बी वह गहरी होती जाए | पहले आपको अपनी साँस पर ध्यान देना है और फिर यह मानना है कि आप धीरे-धीरे वजन-शून्य हो रहे हैं | सिद्धासन और वज्रासन में आप पर गुरुत्वाकर्षण कम पड़ता है और आपने शरीर को हिला डुला कर उस जगह अपने आप को स्थिर करना है जहाँ आपको गुरुत्वाकर्षण सब से कम महसूस होता है |
आध्यात्म में इसीलिए मेरुदंड यानि रीढ़ की हड्डी को सीधा करके बैठने को कहा जाता है ताकि आप पर धरती का बल कम लगे | आपको कुछ दिन अवश्य लगेंगे लेकिन एक दिन आपको यह जरूर महसूस होगा कि आपके शरीर का वजन कम हो रहा है | आप हवा में तैर रहे हैं | उस दिन आपका, अपनी आत्मा से साक्षत्कार होगा क्योंकि वह भी वजन-शून्य है | आप इस विधि से ध्यानावस्था को जल्दी पा सकते हैं |
वजन-शून्य होने पर आपका, सोच से भी पीछा छूट जाता है क्योंकि वह भी शरीर का हिस्सा है और अब आपका शरीर आपके साथ नहीं है | वजन-शून्य होने पर अब आप आत्मा यानि उस स्रोत के साथ हैं जोकि अनन्त है |
