कर्म योग-भाग्य व इच्छाशक्ति
ब्रह्माण्ड में हर ग्रह की अपनी एक दशा और चाल है | चूँकि हमारा शरीर भी एक भौतिक वस्तु है | अतः हमारा शरीर भी ग्रह की तरह सब काम स्वयम कर रहा है |
ब्रह्माण्ड में हर ग्रह की अपनी एक दशा और चाल है | चूँकि हमारा शरीर भी एक भौतिक वस्तु है | अतः हमारा शरीर भी ग्रह की तरह सब काम स्वयम कर रहा है |
कण-कण में भगवान बसते हैं तो क्या अध्यात्म परमाणु यानि Atom के बारे में जानता था ? परमाणु कभी मरता नहीं है तो फिर हमारी मृत्यु कैसे हो जाती है ?
कोई वस्तु या चित्र देख मुँह से अनायास ही निकल जाता है कि किसने बनाया है तो फिर इस ब्रह्माण्ड के रचियता को कैसे भूल जाते हो | इसका रचियता भी तो होगा |
अब साँस की वह विधि बताते हैं जिस से आपका अधिक सोच, गुस्सा, अनिद्रा और अन्य प्रकार की मानसिक और शरीरिक बिमारी से पीछा छूट जायेगा और ध्यान भी लगेगा |
जब मैडिटेशन के लिए बैठते हैं तो पहले शरीर और फिर अवचेतन मन आपको परेशान करता है | हमें अवचेतन मन के पार जाना होता है और ज्यादात्तर यही अटक जाते हैं |
वह इंसान जो वर्तमान में रहते हैं | जिन्हें कोई मानसिक बिमारी या शरीरिक बिमारी नहीं है | केवल वह ही मैडिटेशन सीधे तौर पर शुरू कर सकते हैं या करना चाहिए |