दर्श-ध्यान विधि – 2

आध्यात्म कहता है कि प्राणिक या आत्मिक या अतिचेतन अवस्था ही हमारी इन्द्रियों को संचालित करती है | इसी सोच को अब विज्ञान super consciousness कहता है |

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दर्श-ध्यान विधि – 1

यह सूत्र आपकी सोच और नजर को अंदर की ओर मोड़ता है जिससे कुछ समय के बाद ही आपका अपने आपको और अन्य को देखने का नजरिया अपने आप ही बदल जाएगा |

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छठी इंद्री सक्रिय करें

आप एकाग्रता और लग्न से ध्यान विधि का प्रयोग कर कुछ दिन में ही अपनी संवेदनशील इंद्री के बहाव को बाहर की ओर बहने से रोक पाने में सक्षम हो जायेंगे |

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आहत-नाद ध्यान

यह संगीत सुनते हुए ध्यान लगाने पर आप उस धुन से आगे का संगीत सुनने में समर्थ हो जाते हैं जोकि उस बज रहे संगीत से भी अधिक मधुर है |

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प्रणव ध्यान

विज्ञान भैरव तंत्र सूत्र -39 के अनुसार आपको प्रणव उच्चारण करते हुए अंतिम भाग जब यह समाप्त होता है तब आपको उस शून्य पर पूर्ण ध्यान लगाना है |

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ध्वनि द्वारा ध्यान – 1

इस सूत्र में बताई विधिनुसार कुछ दिन बाद आपको शरीर के अंदर की आवाज के ईलावा भी कुछ ऐसी आवाजें सुनाई देंगी जोकि इस धरती या सौरमंडल की नहीं हैं |

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