श्वास विधि द्वारा ध्यान – 3

सूत्र -26 हमें साँस के प्रति सजग रहने को कहता है लेकिन उस समय जब आने और जाने वाली साँस एक हो गई है यानि सूत्र-24 और 25 का नाभि केंद्र पर मिलन |

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श्वास विधि द्वारा ध्यान – 2

यदि पद्मासन में नहीं बैठ सकते तो सुखासन में बैठे या लेटें और आँख बंद कर साँस के दोनों छोर जहाँ से साँस पलटती है, पकड़ कर ध्यानावस्था में खो जाएँ |

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श्वास विधि द्वारा ध्यान – 1

ये मन्त्र गहराई में छुपा है | जब आपकी साँस गहरी होती चली जाती है तब आपके साँस अंदर खींचते हुए ‘अम’ की ध्वनि आती है और छोड़ते हुए ‘साह’ की |

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प्रेम, ध्यान, डर और सम्बन्ध

मीरा और राधा का प्रेम सच्चा प्रेम था | आप उसे इकतरफा प्रेम भी कह सकते हो | उनका प्रेम यदि अमर हो सकता है तो आपको सच्चा प्रेमी क्यों नहीं मिल सकता ?????

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सत्-चित्त-आनंद

अंतर्मन में हर पल स्वयमेव चलने वाला जाप अपने आप ही हर सम्बन्ध को हमेशा के लिए ठीक कर देगा | क्योंकि अंतर्मन का आनन्द स्वयमेव ही ......

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इंद्री विधि द्वारा ‘ध्यान’ साधना – 2

इस विधि का मुख्य ध्येय ये है कि आपकी उर्जा जो इस इंद्री पर लग रही थी वह रुक जाए और वह तभी रुक सकती है जब आप रोजाना अपनी इच्छा से करें |

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