मिथक – 3

क्षमता और प्रतिभा हर किसी में होती है  लेकिन ज्यादात्तर लोग  सही प्रशिक्षण के अभाव में  या  गलत धारणा या गलत प्रचलन के कारण आम जिन्दगी जीने को मजबूर हो जाते हैं | असफलता या टूटन होने पर प्रेरक कथा-कहानी, पूजा-पाठ, संत-समागम, धार्मिक आस्था इत्यादि पर जोर दिया जाता है ताकि आस्था और विश्वास जागे ऐसी सोच रखना और ऐसा…

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मिथक-2

असफलता व्यक्ति के अंदर कई तरह के डर पैदा कर देती है |  जितनी ज्यादा या देर तक  असफलता रहती है उतना ही वह व्यक्ति-विशेष  अंदरूनी रूप से टूटने लगता है |  सबसे पहले  उस टूटन का इलाज होना चाहिए |  उसकी टूटन का इलाज  उसकी असफलता का विश्लेष्ण कर ही हो सकता है |

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मिथक -1

सफलता प्राप्त करने के लिए व्यक्तित्व विकास यानि Personality development या प्रेरक व्याख्यान यानि Motivational Lectures या सफलता कैसे हासिल करें इस पर प्रशिक्षण दिया जाता है | जबकि........ इच्छाशक्ति यानि willpower और धैर्य यानि patience कैसे जागृत करें,  एकाग्रता यानि concentration  कैसे प्राप्त करें  और  असफलता के मुख्य कारण क्या होते हैं इस पर प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए |

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बस यूँ ही – 9

हम धर्म ग्रन्थ की हर बात पर दुहाई देते हैं बार-बार उसे दोहराते हैं लेकिन हम ने कभी ये समझने की कोशिश नहीं की है कि लिखने वाला ब्रह्मज्ञानी और दिव्य दृष्टा था   और हम अज्ञानी और अन्धें उस भाव तक कैसे पहुँच सकते हैं हम क्यों नहीं समझते हैं कि लिखने वाले के भाव को समझने के लिए…

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बस यूँ ही – 8

नए साल के पहले दिन पूजा स्थल के बाहर लम्बी कतार देख यूँही एक पुरानी कहावत याद आ गई   कि साल के पहले दिन अच्छा करोगे तो पूरे साल तुम्हें अच्छा ही अच्छा मिलेगा क्या सचमुच ऐसा होता है इस जैसी और भी कहावत हैं अच्छे से बुरा कर्म फल कट जाता है जिन्दगी में कुछ न कुछ अच्छा करते रहना चाहिए गंगा नहाने, तीर्थ…

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बस यूँ ही – 7

कर्म करने के बाद प्रश्न उठने का मतलब है कि आपने विचार या भावना के तल पर ही कर्म किया है आप उससे आगे बढ़ ही नहीं पाए आपने मंथन कर भाव के तल पर कर्म नहीं किया है   विचार-भावना-मंथन-भाव-कर्म भावना से विश्वास जन्म लेता है और विश्वास हमेशा डगमगाता है जबकि भाव के तल पर आत्मविश्वास जन्म लेता है जो सदाबहार होता है जैसे…

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