बस यूँ ही -6

हजारों प्रश्न उठ सकते हैं तेज बहती नदी में कूदने से पहले लेकिन कूदने के बाद कभी प्रश्न उठा कि क्या मैं भीग गया हूँ, क्या मैं तैर सकता हूँ क्या मैं किनारे तक पहुँच पाऊंगा फिर कर्म करने के बाद प्रश्न उठने का क्या मतलब निकालें  ज़िन्दगी भी समय की रफ्तार से बहती या भागती ही जा रही है यहाँ किया…

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बस यूँ ही -5

जिन्दगी की हर समस्या का समाधान ही समस्या का जन्मदाता है तो फिर हल क्या है हल इतना-सा है कि हमें प्रश्न या समस्या का हल या समाधान नहीं प्रश्न जिस समाधान से उपजा है वह खोजना है

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बस यूँ ही -4

पढ़ाई-लिखाई हम पर इस कद्र हावी हो चुकी है कि हम जिन्दगी की हर समस्या का समाधान गणित के प्रश्न की तरह खोजने निकल पड़ते हैं और ये भूल जाते हैं कि यहाँ हर समाधान कई और समस्याओं को जन्म देता है

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बस यूँ ही -3

रोज एक नया धर्म जन्म ले रहा है और धर्म के ठेकेदार आज भी जो लिखा या बोला गया है उससे आगे न तो सोचने और न ही बोलने देते हैं तभी तो धर्म पिछड़ रहा है और विज्ञान आगे बढ़ रहा है

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बस यूँ ही -2

अच्छा हुआ कि Newten, Einstein Marie Curie, Galileo जैसे वैज्ञानिक में पैदा नहीं हुए वरना उनकी खोज और किताबों पर एक नया धर्म खड़ा हो जाता उनकी मेहनत और खोज धार्मिक किताब में बंद हो किसी धार्मिक स्थल में मूर्ति या फोटो के साथ रोजाना पूजी जाती

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बस यूँ ही-1

इस शरीर में हम सब किरायेदार हैं मकान मालिक का कब आदेश आ जाएगा किसी को कुछ नहीं मालूम फिर भी सब पर हक जमाते हैं अस्थाई कुछ नहीं चाहिए सब कुछ स्थाई चाहते हैं

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