निद्रा-ध्यान विधि – 2
मनोविज्ञान और आध्यात्म दोनों ही यह मानते हैं कि REM में हम नींद और जागृत अवस्था के बीच में होते हैं तभी तो जागने पर हमें स्वपन याद रह जाते हैं
मनोविज्ञान और आध्यात्म दोनों ही यह मानते हैं कि REM में हम नींद और जागृत अवस्था के बीच में होते हैं तभी तो जागने पर हमें स्वपन याद रह जाते हैं
हम अपने जीवन का लगभग एक तिहाई भाग सो कर गुजारते हैं | आपके सोने पर भी आपका शरीर नहीं सोता है बल्कि वह कमी और कमजोरी को ठीक करने में जुट जाता है ?
इस सूत्र का संदेश है कि हम द्वैत के आदि हो चुके हैं इसके बावजूद भी हमें अँधेरे में ही सकून मिलता है, नींद आती है और आनन्द की प्राप्ति होती है |
आध्यात्म कहता है कि प्राणिक या आत्मिक या अतिचेतन अवस्था ही हमारी इन्द्रियों को संचालित करती है | इसी सोच को अब विज्ञान super consciousness कहता है |
यह सूत्र आपकी सोच और नजर को अंदर की ओर मोड़ता है जिससे कुछ समय के बाद ही आपका अपने आपको और अन्य को देखने का नजरिया अपने आप ही बदल जाएगा |
आप एकाग्रता और लग्न से ध्यान विधि का प्रयोग कर कुछ दिन में ही अपनी संवेदनशील इंद्री के बहाव को बाहर की ओर बहने से रोक पाने में सक्षम हो जायेंगे |