आहत-नाद ध्यान
यह संगीत सुनते हुए ध्यान लगाने पर आप उस धुन से आगे का संगीत सुनने में समर्थ हो जाते हैं जोकि उस बज रहे संगीत से भी अधिक मधुर है |
यह संगीत सुनते हुए ध्यान लगाने पर आप उस धुन से आगे का संगीत सुनने में समर्थ हो जाते हैं जोकि उस बज रहे संगीत से भी अधिक मधुर है |
विज्ञान भैरव तंत्र सूत्र -39 के अनुसार आपको प्रणव उच्चारण करते हुए अंतिम भाग जब यह समाप्त होता है तब आपको उस शून्य पर पूर्ण ध्यान लगाना है |
इस सूत्र में बताई विधिनुसार कुछ दिन बाद आपको शरीर के अंदर की आवाज के ईलावा भी कुछ ऐसी आवाजें सुनाई देंगी जोकि इस धरती या सौरमंडल की नहीं हैं |
इस सूत्र के अनुसार आपकी आँख, कान, नाक और होंठ तो बंद हैं और केवल एक ही इंद्री यानि स्पर्श ही आपको भटका सकती है | बस आपको इस भटकन में नहीं फँसना है |
धीमी और गहरी साँस लेने से उम्र बढ़ती है और शरीरिक बदलाव भी देर से आते हैं या पूरी तरह से नहीं आते हैं | यही संदेश इस सूत्र के माध्यम से दिया गया है |
विज्ञान भैरव तंत्र का यह सूत्र कितनी आसानी से हमें यह सिखा देता है जिसे समझने के लिए पूरा मानव जीवन भी कम पड़ जाता है लेकिन समझ नहीं आता है |