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स्वपन और मृत्यु का सच जानें भाग-2

श्वास विधि द्वारा ध्यान – 5

विज्ञान भैरव तंत्र – सूत्र- 55 (भाग-2)

दोस्तों, यह विधि करते हुए आपको positive रहना है | अच्छा सोचना है | किसी भी तरह की बुराई या बुरी सोच या किसी के प्रति घृणा या गुस्सा है तो उस समय यह विधि न करें | आप ईश्वर के बारे में सोच सकते हैं | जीवन के अच्छे पल या क्षण याद कर यह विधि शुरू कर सकते हैं | आप जब शांत और अच्छा अनुभव कर रहे हों कृपया तभी यह विधि करें |

यह विधि आपको स्वपन लोक में ले जा सकती है | आप तब स्वपन लेते हैं या सपने देखते हैं जब आप सो जाते हैं | आपको अपने सपनों पर कोई कण्ट्रोल नहीं होता | आपके अवचेतन मन में जो भी होता है, जिस के बारे में आप या आपका चेतन मन जानता है या नहीं जानता है, वह सब आपको आपका अवचेतन मन सपने के रूप में दिखाता है | कई बार आप वह भी देख पाते हैं जो भविष्य में होने वाला होता है क्योंकि अवचेतन मन की शक्ति अनंत है |

इस विधि द्वारा आप स्वयम अपनी इच्छा से स्वपन ले सकते हैं | आप इस विधि के द्वारा कभी भी कोई स्वपन जो आपको याद हो और फिर से लेना चाहें तो वह भी कर सकते हैं | इस विधि द्वारा आपका अपने स्वपन पर नियंत्रण यानि control होता है | आप जो सपना लेना चाहें वह सपना ले सकते हैं और वह सपना असल में सच भी हो सकता है | अतः इसीलिए आपको बार-बार बताया और समझाया जा रहा है कि यह विधि positive सोच के साथ करें |

इस विधि में माहिर होने पर आप भविष्य में होने वाली घटनाओं को भी जान सकते हैं | लेकिन आपको इतना माहिर होना होगा कि आप यह जान पायें कि कौन सी घटना आपका मन दिखा रहा है और कौन सी घटना असल में आप देख रहे हैं | विज्ञान में जिसे illusion, आध्यात्म में माया और आम भाषा में भ्रम कहा गया है, वह इस विधि के दौरान अवश्य अपने पैर पसारती है | और ख़ास कर ऐसा  तब होता है जब आप यह समझने लगते हैं कि आप इस विधि में माहिर हो गये हैं या बेमतलब का ‘मैं’ यानि अहम जाग उठता है | यह तब भी होता है जब एक-आधी घटना आपने देखी और वह सच हो जाती है | अतः ईश्वर की कृपा और positive सोच से यदि यह विधि की जाती है तो फल बहुत अच्छे मिलते हैं और यदि सोच गलत है और अहम आ गया है तो फिर इस विधि में भटकन भी बहुत है | अतः अपना व् अपनी सोच पर नियंत्रण रख कर अपने मन से करें | आपको यदि किसी भी तरह का कोई डर या शक या शुभा है तो कृपया न करें या किसी विशेषज्ञ की निगरानी में ही करें |

सूत्र-55 (पहला भाग) :- इस सूत्र में दी गई विधि के अनुसार आपको कमर या पीठ सीधी कर सिद्धासन या सुखासन में बैठ दोनों भवों यानि eyebrow से कुछ ऊपर तिलक की जगह पर ध्यान लगाना है यानि दोनों आँखों की पुतलियों को ऊपर भवों के बीच में देखते हुए आँख बंद कर वहीं ध्यान टिके रहने देना है | जब आपका ध्यान टिक जाता है यानि आपकी आँखे हिलना-डुलना बंद कर देती है तब आपको अपनी साँस पर ध्यान देना है | इस विधि में आप अनाहत या हृदय या हार्ट चक्र या विशुद्ध चक्र यानि थ्रोट चक्र पर भी ध्यान लगा कर साँस पर ध्यान दे सकते हैं |

सूत्र-55 (दूसरा भाग) :- पहले भाग में आप अपनी दोनों आँखों की पुतलियों से ऊपर भवों के बीच में देखते हुए आँख बंद कर वहीं ध्यान टिकाने के बाद साँस पर ध्यान देते हैं |

यहीं से दूसरा भाग शुरू होता हैं | आपने अब साँस पर ध्यान देते हुए साँस को धीरे-धीरे लम्बा और गहरा करना है | आप जब साँस गहरा और लम्बा करेंगे तब साँस के आने और जाने पर स्वयमेव ही आवाज आने लगेगी | यदि साँस लेने और बाहर छोड़ने पर आवाज नहीं आ रही है तो इसका मतलब है साँस में अभी लम्बाई और गहराई नहीं आई हैं | साँस लम्बी और गहरी होते ही आवाज आने लगती है |

ध्वनि के साथ साँस लेना या साँस की आवाज पर ध्यान को केंद्रित करना ही इस विधि के दूसरे भाग का मुख्य अंग है | धीरे-धीरे लम्बी और गहरी साँस लेने पर दिमाग यानि मन की गति अपने आप धीमे होने लगेगी और फिर मन गायब हो जाता है |

आपका ध्यान आज्ञा या अनाहत या विशुद्ध चक्र पर होने के साथ ही साथ साँस पर होने का अर्थ है कि आपका ध्यान आज्ञा चक्र पर है और जब आप साँस ले रहे हैं तब वह इस चक्र से हो कर जाती प्रतीत होगी |

जब आप कुछ समय तक ध्वनि के साथ लम्बी और गहरी साँस लेते हैं तब आप को नींद का आभास होने लगता है या आपका दिमाग यानि मन शून्य होने लगता है | आपके मन विचार आने बंद हो जाते हैं और आपको केवल और केवल साँस की आवाज ही सुनाई देती है | यदि ऐसा होता है तो समझिये कि आपने इस सूत्र का दूसरा भाग पूरा कर लिया है | जब तक आप ऐसा अनुभव नहीं करते हैं तब तक आपको यहीं तक रहना है और इस स्थिति तक पहुँचने की कोशिश करनी है |

एक बार फिर हम आपको आगाह करना चाहते हैं कि यह क्रिया या ध्यान या व्यायाम या योग की कोई भी क्रिया करते हुए शरीर या मन पर जोर देने या जबरदस्ती करने की कोशिश नही करनी है | आप जितना धीरे-धीरे चलेंगे उतनी जल्दी और सदा के लिए उस क्रिया में महारत हासिल कर पायेंगे | अतः जोर-जबरदस्ती न करें |

जबरदस्ती ज्यादा देर तक या दिन में कई बार करने से कोई लाभ नहीं होता है बल्कि उल्टा असर ज्यादा होता है | आप पाँच मिनट भी करते है तो बहुत है | यहाँ गुणवत्ता यानि quality की जरूरत है न कि समय या मात्रा यानि quantity की | आप यदि सच्चे मन से पाँच मिनट भी गहराई से करते हैं तो वह एक घंटा जबरदस्ती बैठने से लाख दर्जे अच्छा है |

Disclaimer/अस्वीकरण:

यह जान लें कि हम यहाँ जो कुछ भी बता रहे हैं वह निजी अनुभव और इस सूत्र में बताई गई जानकारी  है जोकि आपके साथ साझा की जा रही है | जो जानकारी साझा की गई है वह ऐसा या वैसा ही होगा की कोई गारंटी नहीं देती है | यह केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है | अगर आप यह क्रिया करते हैं तो वह आप पर निर्भर करता है | हम आपको किसी तरह से प्रोत्साहित नहीं कर रहे हैं और न ही इसकी जिम्मेदारी लेते हैं | यह क्रिया करते हुए आपको कोई शरीरिक या मानसिक परेशानी या बिमारी होती है तो इसके जिम्मेदार आप खुद होंगे तथा किसी तरह की चिकित्सा सम्बन्धी आपात स्थिति होने पर तुरंत अपने डॉक्टर की सलाह लें |